Monday, April 27, 2015

THE RAIN OF MY LOVE


"बिना विश्वास के कोई एहसास कोई साथ कभी पूर्ण नहीं हो सकता! क्या किसी ने जमीन के बिना किसी पेड़ को उगते देखा है? पहले आधार जरुरी है फिर कोई इमारत बन सकती है, बिना आधार कैसी इमारत, हवाएँ तबाह कर देंगी, आँधियाँ तो दूर! रिश्तों में पहले विश्वास बोइये बाकि स्वतः उग आएंगे। मैं चाहता हूँ कि अगर मैं किसी से बात करूँ तो विश्वास के साथ करूँ वरना बात ही ना करूँ और मैं ऐसा ही चाहता हूँ किसी और के लिए भी, कि अगर कोई मुझसे बात करे तो विश्वास के साथ करे वरना यूँ अजनबीपन के साथ तो हाय हेलो ही काफी है या वो भी नहीं। बातें करना मेरी नज़र में मामूली बात नहीं है, हाँ जिनकी नज़र में ये कोई बात ही ना हो वो आराम से बिना विश्वास के भी बड़ी से बड़ी बातों की इमारतें आपके साथ बना सकते हैं और अगर आप तैयार नहीं तो कोई और सही! ऐसे लोग उड़ान भरने के लिए कोई जमीन तैयार नहीं करते और ऐसे में वो खुद को ले डूबें या ना डूबें पर आपको जरूर ले डूबेंगे। मेरा मानना है कि बिना विश्वास के बातों की रोटियां ना सेंकी जाएँ क्योंकि वो सही से नहीं पक पाएंगी, कच्ची रह जाएँगी! भूख मिटाना ही है तो अच्छी रोटियां तैयार कीजिये, थोड़ी मेहनत कीजिये, ठीक से मन से पकाइये, हर चीज में जल्दीबाजी अच्छी नहीं!"

-शशिष 

Friday, April 24, 2015

THE RAIN OF MY LOVE (2)


"क्या इंसान वाकई कभी तन्हा हो पाता है ? क्या तन्हाइयां वाकई तन्हा होती हैं ? यहाँ तो हमेशा तन्हाइयों में ढ़ेर सारी यादें जमा हो जाती हैं , न जाने कहाँ कहाँ से आ जाती हैं , बस उन्हें एक मौका चाहिए कि हमारे आस पास कोई और न हो , शायद दूसरों से शर्माती हैं ये यादें या फिर डरती हो शायद ! इन्हें अच्छा लगता है कि कोई इनसे बातें करे वो भी एक दम एकांत में , कोई गुनगुनाये इन्हें खामोशियों में एक धीमी सी आवाज़ में जो बस धड़कनों तक सिमट जाये और फैल जाए रूह में ! कोई अकेला होकर भी अकेला नहीं सच तो यही है , जिंदगी बीती यादों का गरौंधा है , यादें घूमते रहती हैं जिंदगी के घर में कभी दिल में जाती हैं कभी आँखों में , और कभी किसी कहानी में तो कभी किसी ग़ज़ल में ! बस यादें ही तो हैं चारों ओर , कुछ सुलझी हुईं यादें कुछ बिलकुल उलझी हुईं यादें और इन दोनों के बीच इंसान और उसकी झूठी तन्हाई , कई बार तो समझ में ही नहीं आता कि आप आज उदास क्यों हैं , क्यों ऐसा है कि कुछ भी करने का मन नहीं कर रहा आज , कभी कभी अपना ही मन कितना अनभिज्ञ मालूम पड़ता है , ऐसा लगता है कि मन अपना होता ही नहीं शायद ये अपना होकर भी दूसरों पे टिका होता है , दूसरों की ख़ुशी दूसरों के गम बहुत कुछ दूसरों के हमारा मन गढ़ते हैं , अजीब बात है न ! पर सच भी है !

काश कि ये अपना मन वाकई अपना होता तो शायद कई मुश्किलें समझ में आ जातीं और अगर समझ में आ जातीं तो कोई न कोई समाधान भी निकल आता लेकिन काश अभी मुकम्मल है , ये काश इतनी आसानी से तो नहीं हटने वाला फिर भी कोशिश में क्या जाता है , आइये कभी अपने मन को अपना कर के देखे और अपनी तन्हाइयों को खुद तक रख के देखे , हाँ मुश्किल तो है पर मजा भी है !"

-शशिष कुमार तिवारी 

Thursday, April 23, 2015

THE RAIN OF MY LOVE (1)


"अजीब बात है न ! कई बार कई लोग जिंदगी में जब मिलते हैं तो तब ऐसा लगता ही नहीं कि एक दिन वो लोग हमारी जिंदगी में इतने अहम हो जायेंगे कि उनके बिना जिंदगी की रफ़्तार बहुत धीरे हो जाएगी। ऐसा लगता ही नहीं कि किसी एक के बिना सबकुछ अधूरा हो सकता है लेकिन फिर भी हम में अधिकतर लोगों ने अपनी जिंदगी के किसी न किसी मोड़ पे इसे एहसास किया है। भले ही वो एहसास पल भर का हो पर होता जरूर है। लेकिन क्या जिंदगी वाकई रुक जाती है ? नहीं ! जिंदगी रूकती नहीं , चलते रहती है हर हाल में , हर मुश्किल में , हां कभी हँसते हुए तो कभी आंसुओं को पोछते हुए पर जिंदगी के कदम हौले हौले ही बढ़ते रहते हैं। एक छोटी सी जिंदगी में न जाने कितने रंग होते हैं और उन तमाम रंगों में रंगीन सी जिंदगी वाकई अजीब है।

हर मिलता हुआ इंसान जिंदगी के कैनवास पर कोई न कोई नया रंग छोड़ जाता है, अब वो रंग चाहे जिंदगी की तस्वीर को और सुन्दर करे या कुछ बिगाड़ दे पर रंग रह जाते हैं हमेशा और जिंदगी उन तमाम रंगों में से एक खूबसूरत तस्वीर बना लेने का नाम है। जब तक आप किसी के साथ रहें ईमानदारी से रहें चाहे वो कैसा भी हो क्योकिं जिंदगी के हर मोड़ पे उस इंसान को न चाहते हुए भी आपकी शालीनता, आपकी ईमानदारी हमेशा याद आते रहेगी। याद रखिये हम अच्छे लोगों को चाह कर भी नहीं भुला पाते। उनकी यादें परछाइयों की तरह हमेशा साथ साथ चलते रहती हैं फिर चाहे वो हमसे कितने भी दूर क्यों न हों। जो पास रह जायेगा वो जिस्म नहीं होगा वो सिर्फ एहसास होगा, एक सुखद एहसास जो अपने किसी को पहुँचाया हो।

इस बार जब कोई नया मिले तो कोशिश कीजिये कि उसे ऐसे एहसासों से आप भरें कि ताउम्र उन एहसासों का कोई विकल्प न हो जो सिर्फ आपसे शुरू हो और आप पे ही हो जाये ख़त्म!!!"

-शशिष कुमार तिवारी